UP Board Hindi Exam Imp Ras Chhand Alankar: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा 18 फरवरी को होने वाली है, इसमें व्याकरण संबंधित रस, छंद, अलंकार से प्रश्न पूछे जाते हैं। दसवीं के विद्यार्थियों को 3 नंबर तथा 12वीं के विद्यार्थियों को 6 नंबर इससे मिलते हैं, इसलिए सभी विद्यार्थी यहां दिए जा रहे हिंदी के महत्वपूर्ण रस छंद अलंकार को याद कर ले।
क्योंकि इनसे संबंधित प्रश्नों में विद्यार्थियों को पूरे नंबर मिलते हैं इसलिए ऐसे टॉपिक को विद्यार्थियों को पहले से ही बेहतर तरीके से कर कर लेना चाहिए ताकि अन्य विषयों पर भी ध्यान दिया जा सके। यहां आपको महत्वपूर्ण रस छंद अलंकार की परिभाषा, उदाहरण, लक्षण, आदि के साथ-साथ लिखने का तरीका भी बताया गया है।
आप सभी को पता होना चाहिए कि रस, छंद, अलंकार कक्षा दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को सभी की परिभाषा और उदाहरण याद करना नहीं होता, बल्कि निम्न क्रम में याद करना होता है जिससे परीक्षा में आपके पूरे नंबर मिल सके –
यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं हिंदी महत्त्वपूर्ण रस छंद अलंकार :
- रस : हास्य या करुण (दोनों में से कोई एक याद करें)
- छंद : सोरठा या रोला (दोनों में से कोई एक याद करें)
- अलंकार : उपमा , रूपक या उत्प्रेक्षा (तीनों में से कोई 2 याद करें)

यूपी बोर्ड कक्षा 12वीं हिंदी महत्त्वपूर्ण रस छंद अलंकार :
- रस : हास्य, करुण, वीर, श्रृंगार या शांत (5 में से कोई 3 याद करें)
- छंद : सोरठा, मात्रिक, चौपाई, दोहा, कुंडलियां (5 में से कोई 3 याद करें)
- अलंकार : अनुप्रास, यमक, श्लेष, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, भ्रांतिमान और संदेह (8 में से कोई 5 याद करें)

10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को इसी क्रम में रस छंद और अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित याद करना है, क्योंकि इससे बाहर कुछ भी पेपर में देखने को नहीं मिलेगा। अगर आप इतना याद करते हैं तो निश्चित 3 या 6 नंबर मिल जाएंगे।
UP Board Hindi Exam Imp Ras Chhand Alankar
18 फरवरी को कक्षा दसवीं की हिंदी विषय की परीक्षा प्रथम पाली में तथा कक्षा 12वीं की हिंदी विषय की परीक्षा द्वितीय पाली में आयोजित होगी। परीक्षा में आने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित यहां आपको याद करने के लिए दिया जा रहा है।
UP Board Hindi Imp. रस (परिभाषा एवं उदाहरण)
1. हास्य रस :
परिभाषा – हास नामक स्थायीभाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को हास्य रस कहते हैं।
उदाहरण – कहा बंदरिया ने बन्दर से चलो नहाने चले गंगा। बच्चो को छोड़ेंगे घर पे होने दो हुडदंगा ॥
2. करुण रस :
परिभाषा – शोक नामक स्थायीभाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को करुण रस कहते हैं।
उदाहरण – रही खरकती हाय शूल-सी, पीड़ा उर में दशरथ के।
ग्लानि, त्रास, वेदना-विमण्डित, शाप कथा वे कह न सके।।
3. वीर रस :
परिभाषा – उत्साह नामक स्थायीभाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को वीर रस कहते हैं।
उदाहरण – वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो कि सिंह की दहाड़ हो।
तुम कभी रुको नहीं, तुम कभी झुको नहीं।
4. श्रृंगार रस :
परिभाषा – रति नामक स्थायीभाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को शृंगार रस कहते हैं। शृंगार रस को रसों का राजा कहा जाता है।
उदाहरण – बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करै भौहनि हँसै, दैन कहै नहि जाय।
5. शांत रस :
परिभाषा – निर्वेद नामक स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भाव से पूर्ण हो रस की निष्पत्ति करता है तो उस रस को शांत रस कहते हैं।
उदाहरण – माटी कहै कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आऐगा, मैं रौंदूगी तोय।
UP Board Hindi Imp. छंद (परिभाषा एवं उदाहरण)
1. चौपाई छंद : परिभाषा और पहचान
यह एक सम मात्रिक छन्द है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके हर एक चरण में 16 मात्राएँ होती है। तुक, पहले चरण की दूसरे और तीसरे चरण के चौथे से मिलती है। यति हर एक चरण के अन्त में होती है।
उदाहरण – नृपन्ह केरि आसा निसि नासी।
बचन नखत अवलीन प्रकासी ॥
मानी महिप कुमुद सकुचाने।
कपटी भूप उलूक लुकाने ॥
2. दोहा छंद : परिभाषा और पहचान
यह अर्ध सम-मात्रिक छंद है, इसमें 4 चरण होते हैं। इसके सम चरणों (दूसरा और चौथा) में 11-11 मात्राएं होती हैं, विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 13-13 मात्राएं होती हैं। तुक, दूसरे चरण की चौथे चरण से। यति हर एक चरण के अन्त में होती है।
उदाहरण – कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर।
समय पाय तरुवर फरै, केतक सींचो नीर।
3. सोरठा छंद : परिभाषा और पहचान गलासा
यह अर्ध सम-मात्रिक छंद है, यह दोहा के ठीक उल्टा होता है, इसमें भी चार चरण होते हैं। दोहा के ठीक विपरीत सोरठा के सम चरणों (दूसरा और चौथा) में 13-13 मात्राएं तथा विषम चरणों (पहला और तीसरा) में 11-11 मात्राएं होती है।
उदाहरण – जिहि सुमिरत सिधि होड़, गन नायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोह, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।
4. कुण्डलियाँ छंद: परिभाषा और पहचान
कुण्डलियां विषम मात्रिक छंद होता है। इसमें 6 चरण होते हैं। शुरू के 2 चरण दोहा और बाद के 4 चरण रोला छंद के होते हैं। इस तरह हर चरण में 24 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण – घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध।
बाहर का बक हंस है, हंस घरेलू गिद्ध।
हंस घरेलू गिद्ध, उसे पूछे ना कोई।
जो बाहर का होई, समादर व्याता सोई।
चित्तवृति यह दूर, कभी न किसी की होगी।
बाहर ही धक्के खायेगा, घर का जोगी॥
UP Board Hindi Imp. अलंकार (परिभाषा एवं उदाहरण)
1. अनुप्रास अलंकार : परिभाषा
जहाँ पर किसी व्यंजन वर्ण की आवृत्ति (दुहराना) होती है, वहाँ पर अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण – रघुपति राघव राजा राम।
2. यमक अलंकार : परिभाषा
जब एक ही शब्द दो या दो से अधिक बार आए पर हर बार अर्थ अलग-अलग हो तो वहाँ पर यमक अलंकार होता है।
उदाहरण – कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय।
या खाये बौराए जग, या पाये बौराये।
3. श्लेष अलंकार : परिभाषा
जहाँ पर कोई एक शब्द एक ही बार आए पर उसके अर्थ अलग-अलग हों, वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है।
उदाहरण – रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गए न उबरै मोती मानस चून॥
4. उपमा अलंकार : परिभाषा
उपमा शब्द का अर्थ होता है – तुलना। जब किन्ही दो वस्तुओं के गुण, आकृति, स्वभाव आदि में समानता दिखाईास जाए या दो भिन्न वस्तुओं कि तुलना कि जाए, तब वहां उपमा अलंकर होता है।
उदाहरण – हरिपद कोमल कमल से।
5. रुपक अलंकार : परिभाषा
जब गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय को ही उपमान बता दिया जाए अर्थात जहाँ पर उपमेय और उपमान में कोई अंतर न दिखाई दे, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण : चरण कमाल बंदाऊ हरि राई।
6. उत्प्रेक्षा अलंकार : परिभाषा
जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए। जहाँ पर अप्रस्तुत को प्रस्तुत मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
उदाहरण – सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।
मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप परयौ प्रभात।
7. भ्रांतिमान अलंकार : परिभाषा
जब उपमेय में उपमान के होने का भ्रम हो जाता है अर्थात जहाँ एक वस्तु को देखने पर दूसरी वस्तु का भ्रम हो जाता है, तो वहाँ पर ‘भ्रांतिमान अलंकार’ होता है।
उदाहरण – ओस बिन्दु चुग रही हंसिनी मोती उनको जाना
8. संदेह अलंकार : परिभाषा
जब उपमेय और उपमान में समता देखकर यह निश्चय नहीं हो पाता कि उपमान वास्तव में उपमेय है या नहीं अथार्त जहाँ पर किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे, वहाँ संदेह अलंकार होता है।
उदहारण – सारी बीच नारी है कि नारी बीच सारी है।
सारी ही की नारी है कि नारी ही की सारी है।
निष्कर्ष: यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं 12वीं के विद्यार्थियों पर सिलेबस के अनुसार यहां से रस, छंद और अलंकार की परिभाषा व उदाहरण याद करें। उदाहरण या परिभाषा अगर आप पहले से पाठ्य पुस्तक से याद किए हैं तो वहीं परीक्षा में लिखें।


